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आवाज देके ना मुझको बुलाओ ,
घबराता हूँ मैँ अब आवाज से ।
नज़रेँ मिलाके ना नज़रेँ झुकाओ ,
क्यूँ जुल्म ढाती हो इस अंदाज़ से ।
ना जाते थे किसी दर पे हम
जब रखा किसी दर पे सर
तो सर को उठाना भूल गये।
सोचा था उनका करेँगे कत्ल
सामने आये जो नायाब सनम्
तो उनपे तलवार उठाना भूल गये।
कितनी बेज़ार है ये दुनियाँ ,
कोई किसी का इंतजार नही करता ,
हूकूमत करता है दिले-यार पे ,
मगर उसे प्यार नही करता ,
एक चर्तुभुज बनाके छोड़ा मुझे ,
कभी वर्ग बनाया, कभी त्रिभुज बनाया
ये कैसी कयामत आई, ये कैसा जुल्म ढाया
कभी परिमाप से मापा मुझे, कभी क्षेत्रफल मेँ नपाया।