शनिवार, सितंबर 24, 2011

वर्षा ऋतु


कारे कजरारे बादलोँ की घटा छा रही,
सारा आसमां सबही के मन भाया है।

सोमवार, सितंबर 19, 2011

मुफ्त मेँ सेहत बनाइये


सुबह-सुबह पार्क मेँ क्या होता है,
मत पूछिए गजब का तमाशा होता है।

औरत हो या मर्द, गर्म हो या सर्द,
उछल-कूद मचती है, इक जोश सा होता है।

गुरुवार, सितंबर 08, 2011

दिन कुछ ऐसे गुजरता है कोई


दिन कुछ ऐसे गुजरता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई

आईना देख के तसल्ली हुई
हमको इस घर मेँ जानता है कोई

शनिवार, अगस्त 06, 2011

लचीलापन(कहानी)



एक साधक के पास एक
व्यक्ति ने आकर अपना
दुखड़ा सुनाया। वह अपनी
पत्नी से बहुत परेशान था।
उसने कहा कि उसकी पत्नी
बहुत कंजूस और कठोर
अनुशासन वाली है। उसके
नियम ,कायदोँ और
पाबंदियोँ से वह तंग आ
गया है।

सोमवार, जुलाई 11, 2011

मेहनत


तकदीर नहीँ , हाथोँ की मेहनत
पहुँचाती साहिल तक हमको।

रेल नहीँ , रेल की पटरी
ले जाती मंजिल तक हमको।

शनिवार, जून 25, 2011

बस छोटा सा जीव हूँ मैँ


बस छोटा सा जीव हूँ मैँ
छोटा सा पेट है मेरा
थोड़ा सा ही खाता हूँ
उसे भी ना पचा पाता हूँ।

शनिवार, जून 11, 2011

भ्रष्टाचार (हास्य व्यंग्य)


रास्ते मेँ जाते हुए मेरा पैर
एक बोतल से टकराया ।

अचानक हुआ एक भयानक विस्फोट
फैल गया चारोँ ओर धुँआ ही धुँआ ।