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कारे कजरारे बादलोँ की घटा छा रही,
सारा आसमां सबही के मन भाया है।
सुबह-सुबह पार्क मेँ क्या होता है,
मत पूछिए गजब का तमाशा होता है।
औरत हो या मर्द, गर्म हो या सर्द,
उछल-कूद मचती है, इक जोश सा होता है।
दिन कुछ ऐसे गुजरता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई
आईना देख के तसल्ली हुई
हमको इस घर मेँ जानता है कोई

एक साधक के पास एक
व्यक्ति ने आकर अपना
दुखड़ा सुनाया। वह अपनी
पत्नी से बहुत परेशान था।
उसने कहा कि उसकी पत्नी
बहुत कंजूस और कठोर
अनुशासन वाली है। उसके
नियम ,कायदोँ और
पाबंदियोँ से वह तंग आ
गया है।
तकदीर नहीँ , हाथोँ की मेहनत
पहुँचाती साहिल तक हमको।
रेल नहीँ , रेल की पटरी
ले जाती मंजिल तक हमको।
बस छोटा सा जीव हूँ मैँ
छोटा सा पेट है मेरा
थोड़ा सा ही खाता हूँ
उसे भी ना पचा पाता हूँ।
रास्ते मेँ जाते हुए मेरा पैर
एक बोतल से टकराया ।
अचानक हुआ एक भयानक विस्फोट
फैल गया चारोँ ओर धुँआ ही धुँआ ।