हमने दिल लगा तो लिया है उनसे,
मगर दिल लगाने की सजा पाई हैँ।
लोग पत्थरोँ से चोट खाते हैँ,
हमने तो फूलोँ से चोट खाई हैँ।।
तमन्ना थी हमको सुहाने मौसम की,
मगर क्यूँ गमोँ की बरसात पाई हैँ।
कहते हैँ लकीरोँ मेँ तकदीर लिखी होती है,
मगर हमनेँ लकीरोँ से ही मात खाई है।।
गालिब ने दुआ दी जिँदगी हजार साल हो,
मगर सालोँ की जिँदगी दिनोँ मेँ बिताई हैँ।
जुग्नूँ बनके आया शमाँ के पास रोशनी के लिए,
मगर शमाँ ने तो मौत की सौगात दी है।।
चिंगम चबाने से कौन सी बीमारी ठीक होती है
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आजकल हम में से बहुत से लोग चिंगम (Chewing Gum) चबाना पसंद करते हैं। कोई इसे
माउथ फ्रेशनर की तरह इस्तेमाल करता है, तो कोई सिर्फ अपने स्ट्रेस को कम करने...
4 हफ़्ते पहले

3 टिप्पणियाँ:
अशोक जी , क्या खूब गजल कही है। दिल लगाने मेँ सजा तो मिलती ही हैँ। भाई सजा तो हमने भी बहुत पाई हैँ। बधाई!
सुन्दर भावपूर्ण रचना.......शुभकामनायेँ।
दिल की बात आपने दिल से लिखी हैँ। शुभकामनायेँ!
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