रविवार, अक्तूबर 31, 2010

जुबाँ की खामोशी

देखकर मुझे ही निगाह, उसकी उठी होगी ,
कोई उसे शायद सतह ना मिली होगी।

लब तो हिले थे उसके, कहना कुछ चाहती होगी,
क्यूँ, मगर कैसे ? वो जुबाँ खामोश रही होगीँ।



कदम दर कदम साथ चलने की सोची होगी,
मगर साथ चलने वाली राह ना मिली होगी।

देख तो लिया था वो मंजर मैँने,
शायद रूकने की वजह ना मिली होगी।

"अंजान" तू तो! एक खरोँच से तिलमिला उठा,
ना जाने उस मासूम पर क्या गुजरी होगी।

33 टिप्पणियाँ:

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

देखकर मुझे ही निगाह, उसकी उठी होगी ,
कोई उसे शायद सतह न मिली होगी...
अच्छा कलाम है...मुबरकबाद.

केवल राम ने कहा…

कदम दर कदम साथ चलने की सोची होगी,
मगर साथ चलने वाली राह ना मिली होगी।
इश्क में राहें ही तो जुदा कर देती हैं दो दिलों की साथ चलने की तम्मना को , खेर यह सब तो बर्षों से चला आ रहा है,
सुंदर ....लेकिन गंभीर
शुभकामनायें

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

डुबो दिया शब्दों में आपने।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

"अंजान" तू तो! एक खरोँच से तिलमिला उठा,
ना जाने उस मासूम पर क्या गुजरी होगी।

बहुत खूबसूरत गज़ल ....

लव की जगह लब कर दें ..

वन्दना ने कहा…

गज़ब का लिखा है……………सीधा दिल पर वार कर दिया…………बेहतरीन्।

दिगम्बर नासवा ने कहा…

"अंजान" तू तो! एक खरोँच से तिलमिला उठा,
ना जाने उस मासूम पर क्या गुजरी होगी ...

बहुत ही लाजवाब ग़ज़ल है ... हर शेर में मस्ती .... गज़ब अंदाज़ है....

Udan Tashtari ने कहा…

बहुत बढ़िया.

संजय भास्कर ने कहा…

बहुत बेहतरीन ग़ज़ल.......दिल से मुबारकबाद|

संजय भास्कर ने कहा…

शानदार लेखन, दमदार प्रस्‍तुति।

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

शाहिद मिर्जा जी , केवल राम जी , प्रवीण पाण्डेय जी , संगीता स्वरूप जी , वन्दना जी , दिगम्बर नासवा जी एवं समीर जी आप सभी का ब्लोग पर आने और हौसला अफजाई के लिए हार्दिक धन्यवाद।

नीरज गोस्वामी ने कहा…

देख तो लिया था वो मंजर मैँने,
शायद रूकने की वजह ना मिली होगी।

waah...bahut khoob...likhte rahen...likhte likhte ravaani aayegi...

Neeraj

ZEAL ने कहा…

बहुत खूबसूरत गज़ल !!!

निर्मला कपिला ने कहा…

देख तो लिया मंजर ----
और
अंजान तू एक ----
वाह बहुत खूब। शुभकामनायें।

उस्ताद जी ने कहा…

4/10

काम चलाऊ पोस्ट
बरखुदार बहुत चाहा पर एक भी शेर पर
वाह न कर पाया

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

संजय जी , नीरज जी , जील जी , निर्मला कपिला जी एवं उस्ताद जी आप सभी का ब्लोग पर आने और हौसलाअफजाई के लिए बहुत बहुत शुक्रियाँ।

DR. ANWER JAMAL ने कहा…

Nice post .
http://vedquran.blogspot.com/2010/11/truth-lies-in-every-soul-anwer-jamal.html

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

भावपूर्ण और सुंदर लेखन .... बधाई

डा. अरुणा कपूर. ने कहा…

सुंदर गजल, सुंदर प्रस्तुति...दिपावली की शुभ-कामनाएं!

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

@ अनवर जमाल जी,
@ मोनिका शर्मा जी,
@ अरूणा कपूर जी
आप सभी का ब्लोग पर आने तथा हौसलाअफजाई के लिए तहे-दिल से शुक्रिया।

DEEPAK BABA ने कहा…

khubsoorat gazal.......

lagta hai ustaad je ke jhole mein aaj kam number the......

ath inhi se kaam chala lo.

Akhtar Khan Akela ने कहा…

aadrniy aapne jis khubsurt andaaz men aek pyaaar krne vali chaht ki bebsi bekli byan ki he voh vaastv men qaabile taarif he mubark ho. kahtar khan akela kota rajsthan

Amit K Sagar ने कहा…

एक उम्दा रचना. मजा आ गया महोदय. जारी रहें.
--
धनतेरस व दिवाली की सपरिवार बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनाएं.
-
वात्स्यायन गली

Ramesh singh ने कहा…

'अंजान' तू तो! एक खरोँच से तिलमिला उठा ;
ना जाने उस मासूम पर क्या गुजरी होगी;

वाह क्या शेर हैँ। अंदाजे ब्याँ निराला हैँ। आभार जी

अनुपमा पाठक ने कहा…

मगर साथ चलने वाली राह ना मिली होगी।
waah!
sundar shabdrachna!

ललित शर्मा ने कहा…

बहुत बढिया

दीपावली की शुभकामनाएं

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बढ़िया है,
दीवाली की हार्दिक शुभकामनायें.
एक सलाह/नेक सलाह:-
अच्छे ग़ज़लकारों को ज़रूर पढ़ें.

कुँवर कुसुमेश

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

@दीपक जी
@अख्तर खान अकेला जी
@अमित जी
@रमेश जी
@ललित जी
@अनुपमा पाठक जी
आप सभी का ब्लोग पर आने तथा हौसलाअफजाई के लिए हार्दिक धन्यवाद।

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

"na jane uss masum par kya gujri hogi..."


bahut khub, pyari gajal!!

अशोक मिश्र ने कहा…

"अंजान" तू तो! एक खरोँच से तिलमिला उठा,
ना जाने उस मासूम पर क्या गुजरी होगी।

कितनी अच्छी गजल लिखी है आपने ....
दर्द को किस शिद्दत से उकेरा है ....
धन्यवाद....

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

@कुँवर कुशमेश जी
@मुकेश कुमार जी
@अशोक मिश्र जी
आप सभी महोदय जी का ब्लोग पर आने तथा आपके इस स्नैहपूर्ण लगाव के लिए दिल से आभार।

DR. PAWAN K MISHRA ने कहा…

देखकर मुझे ही निगाह, उसकी उठी होगी ,
कोई उसे शायद सतह ना मिली होगी।
kya likhte hai aap
abhar.........

वीना ने कहा…

देखकर मुझे ही निगाह, उसकी उठी होगी ,
कोई उसे शायद सतह न मिली होगी...

बहुत सुंदर.....

zindagi-uniquewoman.blogspot.com ने कहा…

bhavpur rachna k liye bhadai....