जमीँ पे हैँ चाँद छुपा हुआ। लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
जमीँ पे हैँ चाँद छुपा हुआ। लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, अक्टूबर 03, 2010

जमीँ पे है चाँद छुपा हुआ

ना जाने क्या हुआ
     जो तूने छू लिया,
         शरीर मेँ लहू दौड़ने लगा
              कुछ नशा-सा हुआ।।


आँखोँ मेँ मेरी झाँककर
     जब तूने चेहरा झुका लिया,
          लगा मुझे जैसे जमीँ पे
                है चाँद छुपा हुआ।।