सोमवार, अप्रैल 11, 2011

जमाना


कैसा आ गया है जमाना अब रिश्वत का ,
ये हवायेँ करेँगी फैसला अब दीये की किस्मत का ।

3 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

यही हवायें दमदार हैं, मशाल जलानी होगी।

: केवल राम : ने कहा…

कर देंगी फैसला वक़्त आने पर ...!

सारा सच ने कहा…

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