सोमवार, सितंबर 19, 2011

मुफ्त मेँ सेहत बनाइये


सुबह-सुबह पार्क मेँ क्या होता है,
मत पूछिए गजब का तमाशा होता है।

औरत हो या मर्द, गर्म हो या सर्द,
उछल-कूद मचती है, इक जोश सा होता है।

हर तरफ शोरे वाह-वाह होता है,
सुबह-सुबह पार्क मेँ क्या होता है।

उछना-कूदना भी एक मानक है,
यह सेहत के लिए एक टाँनिक है।

आप भी जाइए, इस टाँनिक को आजमाइये,
बेबाक जिँदगी के मजे लेते रहिये।

हँसिए और हँसाइये, खूब ठहाके लगाइये,
इसी तरह मुफ्त मेँ सेहत बनाइये।

3 टिप्पणियाँ:

संजय भास्कर ने कहा…

हँसिए और हँसाइये, खूब ठहाके लगाइये,
इसी तरह मुफ्त मेँ सेहत बनाइये।
.....सही कहा है......सुन्दर अभिव्यक्ति। बधाई!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आपकी पोस्ट ने वह आनन्द दे दिया है।

संजय भास्कर ने कहा…

अरे कमाल का लिखा है आज तो