सोमवार, नवंबर 21, 2011

कभी न डरना


सच कहने से प्यारे कभी तुम न डरना आगे बढ़ते रहना,
धर्म के कामोँ मेँ तुम आगे बढ़ते रहना।

देश की खातिर भी तुम आगे बढ़ते चलना,
स्वर्ग मार्ग दिखाता है ऐसा करना।

बड़े बड़ोँ ने सच कहा है मानो तुम भी,
"जैसा करोगे वैसा ही फिर होगा भरना"
सुकर्म है नेकी का पथ याद रहे ये।

बहता रहता है सदा ही ऐसा झरना,
रीत यही है प्रीत की, कि मिल बैठो,
एक दूजे से हरदम प्यार ही करना।

6 टिप्पणियाँ:

मनोज कुमार ने कहा…

रीत यही है प्रीत की, कि मिल बैठो,
एक दूजे से हरदम प्यार ही करना।
सुंदर भाव।

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्यार परस्पर राह बने,
मिलकर चलना चाह बने।

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

सार्थक सन्देश देती अच्छी प्रस्तुति

संजय भास्कर ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति...बेहतरीन पंक्तियाँ



संजय भास्कर
आदत...मुस्कुराने की
http://sanjaybhaskar.blogspot.com

Patali-The-Village ने कहा…

सार्थक सन्देश देती सुंदर प्रस्तुति|

Shanti Garg ने कहा…

बहुत बेहतरीन....
मेरे ब्लॉग पर आपका हार्दिक स्वागत है।