रविवार, फ़रवरी 20, 2011

सितारा कहूँ क्यूँ ? चाँद है तू मेरा


भूल गया अब ये दिल मेरा ,
जो हुआ था गम इसे तेरा ।

ढूढ़ता है तुम्हीँ को अब ये ,
देखा है जब से चहरा तेरा ।

आईना आँखोँ का साफ है तेरा ,
दिखता है इसमेँ चहरा सिर्फ मेरा ।

सितारा कहूँ क्यूँ ? चाँद है तू मेरा ,
तू जमीँ नहीँ आसमां है मेरा ।

"अंजान" कैद पिँजरे मेँ परिन्दे की तरह ,
सोया है मुकद्दर हर वक्त मेरा ।

32 टिप्पणियाँ:

vandan gupta ने कहा…

।बहुत सुन्दर प्रस्तुति।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

bahut hi badhiyaa

केवल राम ने कहा…

सितारा कहूँ क्यूँ ? चाँद है तू मेरा ,
तू जमीँ नहीँ आसमां है मेरा ।

मेरी जिन्दगी है तू ,हर सांस है तेरा ..
.बहुत लाजबाब भाई ...भावपूर्ण और अर्थपूर्ण

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आईना आँखोँ का साफ है तेरा ,
दिखता है इसमेँ चहरा सिर्फ मेरा ...

Vaah ... kya baat hai ... prem ki inteha hai ...

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

भावमयी रचना ..बहुत खूब

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत भावपूर्ण प्रस्तुति..बहुत सुन्दर

OM KASHYAP ने कहा…

bahut sunder gazal

Kunwar Kusumesh ने कहा…

सितारा कहूँ क्यूँ ? चाँद है तू मेरा ,
तू जमीँ नहीँ आसमां है मेरा ।

वाह अशोक जी, उक्त शेर अच्छा लगा .ग़ज़ल के भाव देखने लायक हैं.

Minakshi Pant ने कहा…

सुन्दर रचना |

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> वन्दना जी
>>> रश्मि प्रभा जी
>>> केवल राम जी
>>> दिगम्बर नासवा जी

आप सभी का ब्लोग पर आकर उत्साहबर्धन करने तथा सहयोग के लिए तहेदिल से शुक्रियाँ ।

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> संगीता स्वरूप जी
>>> कैलाश सी शर्मा जी
>>> ओम कश्यप जी
>>> कुवँर कुशमेश जी

आप सभी के सहयोग एवं स्नैह के लिए आभार ।

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

bahu pyari prastuti..:)

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

बेहतरीन प्रस्तुति।

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> मीनाँक्षी पंत जी
>>> मुकेश कुमार सिँहा जी
>>> प्रवीण पाण्डेय जी

आप सभी का ब्लोग पर आकर उत्साहबर्धन तथा सहयोग के लिए धन्यवाद ।

daanish ने कहा…

अच्छे विचारों से
सजी - संवरी
खूबसूरत रचना .....

ZEAL ने कहा…

"अंजान" कैद पिँजरे मेँ परिन्दे की तरह ,
सोया है मुकद्दर हर वक्त मेरा ...

awesome !

.

Unknown ने कहा…

सितारा कहूँ क्यूँ ? चाँद है तू मेरा ,
तू जमीँ नहीँ आसमां है मेरा ।

बहुत अच्छा शेर....
सुंदर प्रस्तुति

मनोज कुमार ने कहा…

कवि की भाषिक संवेदना पाठक को आत्‍मीय दुनिया की सैर कराने में सक्षम है।

आपका अख्तर खान अकेला ने कहा…

ashok bhai subh subajtbiyt khush ho gyi aapki gzl pdh kr mubaark ho. akhtar khan akela kota rajstan

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> दानिश जी
>>> दिव्या जी
>>> वीना जी
>>> मनोज जी

आप सभी का ब्लोग पर आकर प्रोत्साहन एवं स्नैह से अनुग्रहित करने लिए हार्दिक धन्यवाद ।

रमेश कुमार जैन उर्फ़ निर्भीक ने कहा…

विचारों की सुंदर अभिव्यक्ति.
हमारी विनम्र अनुरोध के साथ ही इच्छा हैं कि-अगर आपको समय मिले तो कृपया करके मेरे (http://sirfiraa.blogspot.com, http://rksirfiraa.blogspot.com, http://mubarakbad.blogspot.com, http://aapkomubarakho.blogspot.com, http://aap-ki-shayari.blogspot.com, http://sachchadost.blogspot.com) ब्लोगों का भी अवलोकन करें. हमारी या हमारे ब्लोगों की आलोचनात्मक टिप्पणी करके हमारा मार्गदर्शन करें. हम आपकी आलोचनात्मक टिप्पणी का दिल की गहराईयों से स्वागत करने के साथ ही प्रकाशित करने का आपसे वादा करते हैं निष्पक्ष, निडर, अपराध विरोधी व आजाद विचारधारा वाला प्रकाशक, मुद्रक, संपादक, स्वतंत्र पत्रकार, कवि व लेखक रमेश कुमार जैन उर्फ़ "सिरफिरा" फ़ोन:9868262751, 9910350461 email: sirfiraa@gmail.com

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर ....भावपूर्ण रचना

नीरज गोस्वामी ने कहा…

वाह...इस बेहतरीन रचना के लिए बधाई स्वीकारें...

नीरज

निर्मला कपिला ने कहा…

सितारा कहूँ क्यूँ ? चाँद है तू मेरा ,
तू जमीँ नहीँ आसमां है मेरा ।
बहुत खूबसूरत प्रेमाभिव्यक्ति। शुभकामनायें।

मनोज कुमार ने कहा…

खूबसूरत भावाभिव्यक्ति।

आपका अख्तर खान अकेला ने कहा…

ashok ji aapki is gzal ko baar baar pdhne ko ji krta he . akhtar khan akela kota rajsthan

Sadhana Vaid ने कहा…

सुन्दर भावाभिव्यक्ति ! बधाई एवं शुभकामनायें !

यशवन्त माथुर ने कहा…

कल 02/03/2012 को आपकी यह पोस्ट नयी पुरानी हलचल पर लिंक की जा रही हैं.आपके सुझावों का स्वागत है .
धन्यवाद!

स्वाति ने कहा…

आईना आँखोँ का साफ है तेरा ,
दिखता है इसमेँ चहरा सिर्फ मेरा ।
भावुक करती पंक्तियाँ...

***Punam*** ने कहा…

सुंदर प्रस्तुति.....

मेरा मन पंछी सा ने कहा…

वाह|||
बहुत ही सुन्दर रचना है.

Dr.Ashutosh Mishra "Ashu" ने कहा…

umda prastuti