मंगलवार, जुलाई 06, 2010

नारी की लाचारी

मैँने अखबार मेँ पढ़ा कि एक महिला से उसके शराबी पति ने शराब के लिए पैसे माँगे जो कि उसके पास नहीँ थे तो उसने मना कर दिया। फिर पति ने मंगलसूञ माँगा बेचकर शराब लाने के लिए तो उसने कहा ये मेरा सुहाग है इसे मैँ नहीँ दुँगी ।इतने पर पति ने महिला के मुँह पर तेजाब फेँक दिया और मँगलसूञ तोड़कर भाग गया। मैँने इस घटना को इन शव्दोँ मेँ ब्यान किया हैँ ।.....................


पढ़कर रह गया हैरान,
    मैँ इस समाचार को।
        सुहाग ने माँगा अबला से,
             जब उसके सुहाग को।।

देने से कर दिया मना,
    जब उसने अपने सुहाग को,
       झोँक दिया उस हैवान ने,
           उसकी आँखोँ मेँ तेजाब को।।

पहले था इंसान देवता,
    क्यूँ बना दिया हैवान
        अब इस इंसान को,

कर्म यही रहा इंसान अगर तेरा,
तरस जायेगा तू नाज्मी के दीदार को।।

3 टिप्पणियाँ:

सुधा शर्मा ने कहा…

आपने बहुत सही कहा, अगर नारी पर इस तरह ही जुल्म होते रहे , अस्त्तिव ही समाप्त हो जायेगा। मेरे ब्लोग पर आने के लिएं इस पते पर क्लिक कर सकते हैँ।

shilpa shree ने कहा…

vry well written...keep writing ur feelings. all d bst for ur blog.

minakshi pant ने कहा…

पुरुष होने के उपरांत नारी की भावनाओ को व्यक्त करते देख मुझे बहुत ख़ुशी हुई दोस्त ! आप सच मै भावनाओ की कदर जानते हैं !