हमने दिल लगा तो लिया है उनसे,
मगर दिल लगाने की सजा पाई हैँ।
लोग पत्थरोँ से चोट खाते हैँ,
हमने तो फूलोँ से चोट खाई हैँ।।
तमन्ना थी हमको सुहाने मौसम की,
मगर क्यूँ गमोँ की बरसात पाई हैँ।
कहते हैँ लकीरोँ मेँ तकदीर लिखी होती है,
मगर हमनेँ लकीरोँ से ही मात खाई है।।
गालिब ने दुआ दी जिँदगी हजार साल हो,
मगर सालोँ की जिँदगी दिनोँ मेँ बिताई हैँ।
जुग्नूँ बनके आया शमाँ के पास रोशनी के लिए,
मगर शमाँ ने तो मौत की सौगात दी है।।
ब्लड प्रेशर की जांच कराते वक्त नहीं करनी चाहिए ये 7 गलतियां ।
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ब्लड प्रेशर की जांच कराते वक्त अक्सर लोग कई प्रकार की गलतियां करते हैं,
जिनके बारे में वह अनजान होते हैं। अगर आप भी इन गलतियों के बारे में नहीं
जानते तो ह...
5 वर्ष पहले
3 टिप्पणियाँ:
अशोक जी , क्या खूब गजल कही है। दिल लगाने मेँ सजा तो मिलती ही हैँ। भाई सजा तो हमने भी बहुत पाई हैँ। बधाई!
सुन्दर भावपूर्ण रचना.......शुभकामनायेँ।
दिल की बात आपने दिल से लिखी हैँ। शुभकामनायेँ!
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