रविवार, सितंबर 12, 2010

जिसको तुम अपना कहते हो यारो , बहम तुम्हारा है।

खो जाने दो मुझको यारो , उन गुमनाम अंधेरोँ मेँ ।
 लौटे जहाँ से कोई ना सुरज , आते देख सवेरोँ मेँ।।
  
       पोछो मत तुम मेरे आँसू , इनको अब बह जाने दो ।
       देखेगा जब कोई इनको , अपनी व्यथा सुनाने दो।।

 मेरी तड़पन मेरे दिल से , यारो अब तुम मत पूछो ।
 जहाँ ले चली राहेँ मुझको , जाने दो तुम मत रोको।।


       जब-जब मेरी आस बंधी हैँ, साथ ही साथ वो टूट गई ।
       जीवन नैया जब-जब देखो, साथ ही साथ वो छूट गई।।

 जिसको तुम अपना कहते हो , यारो बहम तुम्हारा हैँ।
 टूट चुका हैँ अपना सितारा , ये सब गलत नजारा है।।

       लुभा ना पायी चमक-दमक ये , मुझको मेरे विचारो को।
       ढूढ रहा है "अंजान" अपने, टूटे हुए सितारोँ को।।

17 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

भाव प्रधान पंक्तियाँ।

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!
काव्यशास्त्र (भाग-1) – काव्य का प्रयोजन, “मनोज” पर, आचार्य परशुराम राय की प्रस्तुति पढिए!

Akanksha~आकांक्षा ने कहा…

लुभा ना पायी चमक-दमक ये , मुझको मेरे विचारो को।
ढूढ रहा है "अंजान" अपने, टूटे हुए सितारोँ को।।
....बहुत खूब...उम्दा !

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'शब्द-शिखर' पर आपका स्वागत है !!

Asha ने कहा…

भाव पूर्ण रचना के लिए हार्दिक बधाई |
आशा

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

बहुत खूबसूरती से लिखे हैं एहसास ..पर जीवन चलने का नाम ..और सितारे भी चमकेंगे ..हौसला चाहिए ...

Shah Nawaz ने कहा…

खो जाने दो मुझको यारो , उन गुमनाम अंधेरोँ मेँ ।
लौटे जहाँ से कोई ना सुरज , आते देख सवेरोँ मेँ।।

पोछो मत तुम मेरे आँसू , इनको अब बह जाने दो ।
देखेगा जब कोई इनको , अपनी व्यथा सुनाने दो।


बेहद खूबसूरत अश`आर.....

ओशो रजनीश ने कहा…

पोछो मत तुम मेरे आँसू , इनको अब बह जाने दो ।
देखेगा जब कोई इनको , अपनी व्यथा सुनाने दो।।

अच्छी लगी आपकी कविता

रानीविशाल ने कहा…

Sundar bhav sanjoe hai aapane is kavita main .....Shubhkaamnaae!
ek nigaah yahan bhi
http://anushkajoshi.blogspot.com/

shikha varshney ने कहा…

भावपूर्ण पंक्तियाँ .
ब्लॉग पर इज्जत अफजाई का बहुत बहुत शुक्रिया.

Shaivalika Joshi ने कहा…

पोछो मत तुम मेरे आँसू , इनको अब बह जाने दो ।
देखेगा जब कोई इनको , अपनी व्यथा सुनाने दो।।

Bahut hi mohak panktiyaan
Dil ko chhu jati hain....

Babli ने कहा…

सुन्दर एहसास के साथ लिखी हुई इस शानदार और लाजवाब रचना के लिए बहुत बहुत बधाई!

शारदा अरोरा ने कहा…

ग़ज़ल में बोल बड़ी खूबसूरती से उभर रहे हैं , पर इतनी मायूसी अच्छी नहीं ।

राकेश कौशिक ने कहा…

सुंदर रचना

लुभा ना पायी चमक-दमक ये,मुझको मेरे विचारो को।
ढूढ रहा है "अंजान" अपने, टूटे हुए सितारोँ को।।

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

आप सभी आदरणीये तथा प्रिय मित्रोँ का स्नैह रुपी तथा उत्प्ररक टिपणियोँ के लिए बहुत - बहुत शुक्रिया ।

Ramesh singh ने कहा…

बहुत ही खूबसूरत कविता हैँ। शुभकामनायेँ

zindagi-uniquewoman.blogspot.com ने कहा…

bahut hi shandar shabdo se nawaji gayi kavita.....bhadai...

Shilpa Shree ने कहा…

aapne bahut sunder kavita likhi hai...congrts.