रविवार, सितंबर 19, 2010

ऐ चाँद बता तु तेरा हाल क्या है ?

ऐ-चाँद बता तू ,
  तेरा हाल क्या हैँ ?
    किस जुस्तजू मेँ ,
      तू फँसा हुआ ?
        क्यूँ छाया हुआ
          घनघोर अँधेरा ।
            बता तेरी चाँदनी
               को हुआ क्या हैँ ?


कभी तिल-तिल घटता हैँ ,
  कभी बढ़ता हैँ तू ,
    क्यूँ आसमाँ से
      तू जुदा हुआ है ?
        कहाँ हैँ तू
          क्यूँ छुपा हुआ हैँ।

क्यूँ शरमा रहा है तु ,
  तू क्यूँ घबराया हुआ ?
    जो दाग है तुझमेँ ,
      क्यूँ उससे खौफ
        खाया हुआ है ?
         बता तो तू मुझे ,
            क्यूँ इन बादलोँ
              बीच छुपा हुआ हैँ ।

18 टिप्पणियाँ:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

अब बादल हट ही नहीं रहे हैं तो बेचारा चाँद क्या करे ?
अच्छी प्रस्तुति

Shilpa Shree ने कहा…

thanx for ue comment.i used to read ur blog.ur posts r really incredible.

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी प्रस्तुति। हार्दिक शुभकामनाएं!

काव्य के हेतु (कारण अथवा साधन), परशुराम राय, द्वारा “मनोज” पर, पढिए!

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

धरती की दुर्दशा पर छिप के ही रो लेता है।

प्रवीण त्रिवेदी ने कहा…

चाँद इस मामले में भैये बड़ा दल बदलू टाइप का रहा है ....सो हम क्या कहें ?.........सो सोच विचार कर ही :-)

संजय भास्‍कर ने कहा…

....अच्छी प्रस्तुति

संजय भास्‍कर ने कहा…

वाह!!!वाह!!! क्या कहने, बेहद उम्दा

Asha Lata Saxena ने कहा…

बहुत बहुत बधाई अच्छी रचना के लिए |
आपका मेरे ब्लॉग पर स्वागत है |इसी प्रकार
प्रोत्साहित करते रहें |आभार ब्लॉग पर आने के लिए
आशा

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

जो दाग है तुझमेँ ,
क्यूँ उससे खौफ
खाया हुआ है ?
शायद नहीं...बल्कि ये प्रेरणा देता है कि चांदनी बांटकर दूसरों की ज़िन्दगी में कुछ उजाला किया जा सकता है.
अच्छी रचना है...बधाई.

शारदा अरोरा ने कहा…

चाँद पर बढ़िया कविता , संवेदनशील मन के क्या कहने !

Archana ने कहा…

very nice poen on chaand

ashish ने कहा…

बहूत खूब. आपने चाँद को उसके दाग की याद दिलाकर अच्छा ही किया , वो जरुर निकलेगा बादलो के ओट से . खूबसूरत भाव

Manoj K ने कहा…

चंद और चांदनी की सुंदरता का सुन्दर उल्लेख, बधाई डॉ साब.

Minakshi Pant ने कहा…

चाँद को लेकर आपने बहुत खुबसूरत रचना लिखी है !

Dr Xitija Singh ने कहा…

achhi rachna dr sahaab.... badhai swikaarein.... aap mere blog par padhare uske liye bhi dhanyawaad...

उपेन्द्र कुमार सिंह ने कहा…

नमस्कार अशोक जी!!!!!!!
बहुत ही उम्दा , आज भी चाँद कवियों की
प्रेरणा का स्रोत है...........इसके प्रेरक गुण
का सदियों से कवियों ने दोहन किया है आप
पूर्णत: सफ़ल रहे भावनओं को शब्दों में
निरूपित करने में.....................
धन्यवाद..............

Ramesh singh ने कहा…

चाँद पर लिखी आपकी कविता दिल को छू गई। बहुत कमाल का लिखते हैँ आप। बहुत-बहुत बधाई।

रविंद्र "रवी" ने कहा…

बहुत ही अच्छी प्रस्तुति. एक कवी ही है ज्यो चाँद से उसके हालत पूंछ सकता है. वरन ये दुनियावाले बड़े बेदर्द होते है. चाँद की क्यों सोचेंगे.