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सच कहने से प्यारे कभी तुम न डरना आगे बढ़ते रहना,
धर्म के कामोँ मेँ तुम आगे बढ़ते रहना।
देश की खातिर भी तुम आगे बढ़ते चलना,
स्वर्ग मार्ग दिखाता है ऐसा करना।
कर्म दैविक सम्पदा का द्वार है;
विश्व के उत्कर्ष का आधार है।
कर्म पूजा, साधना का धाम है;
कर्मयोगी को कहीँ विश्राम है।
मानव विकास की चाह मेँ।
बढ़ता हुआ इंसान।।
भौतिक सुखोँ की तलाश मेँ।
प्रकृति के नियमोँ का उल्लंघन कर।
एकांकी बन गया इंसान।।
कारे कजरारे बादलोँ की घटा छा रही,
सारा आसमां सबही के मन भाया है।
सुबह-सुबह पार्क मेँ क्या होता है,
मत पूछिए गजब का तमाशा होता है।
औरत हो या मर्द, गर्म हो या सर्द,
उछल-कूद मचती है, इक जोश सा होता है।
दिन कुछ ऐसे गुजरता है कोई
जैसे एहसान उतारता है कोई
आईना देख के तसल्ली हुई
हमको इस घर मेँ जानता है कोई

एक साधक के पास एक
व्यक्ति ने आकर अपना
दुखड़ा सुनाया। वह अपनी
पत्नी से बहुत परेशान था।
उसने कहा कि उसकी पत्नी
बहुत कंजूस और कठोर
अनुशासन वाली है। उसके
नियम ,कायदोँ और
पाबंदियोँ से वह तंग आ
गया है।