शनिवार, जून 25, 2011

बस छोटा सा जीव हूँ मैँ


बस छोटा सा जीव हूँ मैँ
छोटा सा पेट है मेरा
थोड़ा सा ही खाता हूँ
उसे भी ना पचा पाता हूँ।

शनिवार, जून 11, 2011

भ्रष्टाचार (हास्य व्यंग्य)


रास्ते मेँ जाते हुए मेरा पैर
एक बोतल से टकराया ।

अचानक हुआ एक भयानक विस्फोट
फैल गया चारोँ ओर धुँआ ही धुँआ ।

शनिवार, मई 28, 2011

जिँदगी क्या मोड़ लेती है


जिँदगी क्या मोड़ लेती है
हमारा साथ छोड़ देती है ।

गुजरा हुआ पल, बीता हुआ कल,
जिनकी याद मुझे आती है ।

रविवार, अप्रैल 24, 2011

ख्वाब रखो


रहो जमीँ पे मगर आसमां का ख्वाब रखो,
तुम अपनी सोच को हर वक्त लाजवाब रखो।

खड़े न हो सको इतना न सर को झुकाओ कभी,
तुम अपने हाथ मेँ किरदार की किताब रखो।

रविवार, अप्रैल 17, 2011

बस ढूंढते रह जाओगे


चीजोँ मेँ कुछ चीज, बातोँ मेँ कुछ बातेँ,
वो होगी, जो देख नहीँ पाओगे
कुछ समय बाद, बस ढूँढते रह जाओगे ।

बच्चोँ मेँ बचपन, जवानोँ मेँ यौवन,
संतो की वाणी, कर्ण सा दानी
नल मेँ पानी, जैल सिँह सा ग्यानी
नानी की कहानी, रावण सा अभिमानी ।
कुछ सालोँ बाद, बस ढूंढते रह जाओगे ।

सोमवार, अप्रैल 11, 2011

जमाना


कैसा आ गया है जमाना अब रिश्वत का ,
ये हवायेँ करेँगी फैसला अब दीये की किस्मत का ।

रविवार, मार्च 27, 2011

उन्हीँने भुला दिया मुझे जिनपे दिल निसार था


उन्हीँने भुला दिया मुझे जिनपे दिल निसार था ,
लूटा ही गया है मुझको नाम देकर प्यार का ।

ऊपर से हँस दिया मैँ लेकिन दिल मेँ उदासी ही रही ,
क्या मेरी जिँदगी मेँ खुशियाँ जरा सी भी नहीँ ,
भटकता रहा हूँ मैँ कब से तलाशे मुहब्बत मेँ ,
प्यार भरी मेरी ये निगाहेँ प्यार की प्यासी ही रहीँ ।