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बस छोटा सा जीव हूँ मैँ
छोटा सा पेट है मेरा
थोड़ा सा ही खाता हूँ
उसे भी ना पचा पाता हूँ।
रास्ते मेँ जाते हुए मेरा पैर
एक बोतल से टकराया ।
अचानक हुआ एक भयानक विस्फोट
फैल गया चारोँ ओर धुँआ ही धुँआ ।
जिँदगी क्या मोड़ लेती है
हमारा साथ छोड़ देती है ।
गुजरा हुआ पल, बीता हुआ कल,
जिनकी याद मुझे आती है ।
रहो जमीँ पे मगर आसमां का ख्वाब रखो,
तुम अपनी सोच को हर वक्त लाजवाब रखो।
खड़े न हो सको इतना न सर को झुकाओ कभी,
तुम अपने हाथ मेँ किरदार की किताब रखो।
चीजोँ मेँ कुछ चीज, बातोँ मेँ कुछ बातेँ,
वो होगी, जो देख नहीँ पाओगे
कुछ समय बाद, बस ढूँढते रह जाओगे ।
बच्चोँ मेँ बचपन, जवानोँ मेँ यौवन,
संतो की वाणी, कर्ण सा दानी
नल मेँ पानी, जैल सिँह सा ग्यानी
नानी की कहानी, रावण सा अभिमानी ।
कुछ सालोँ बाद, बस ढूंढते रह जाओगे ।
कैसा आ गया है जमाना अब रिश्वत का ,
ये हवायेँ करेँगी फैसला अब दीये की किस्मत का ।
उन्हीँने भुला दिया मुझे जिनपे दिल निसार था ,
लूटा ही गया है मुझको नाम देकर प्यार का ।
ऊपर से हँस दिया मैँ लेकिन दिल मेँ उदासी ही रही ,
क्या मेरी जिँदगी मेँ खुशियाँ जरा सी भी नहीँ ,
भटकता रहा हूँ मैँ कब से तलाशे मुहब्बत मेँ ,
प्यार भरी मेरी ये निगाहेँ प्यार की प्यासी ही रहीँ ।