शनिवार, जनवरी 01, 2011

खुदा से भी पहले हमेँ याद आयेगा कोई


बंद गलियोँ से कोई गुजर ना जाये कहीँ ,
ये तो वक्त है सिर्फ वक्त की आवाज नहीँ।

दीदार किया जब से तेरा भाया ना कोई ,
पाने की आरजू मेँ कोई मिट ना जाये कही

मनाना भी आता है हमेँ खफा ना होना कोई ,
चाहता है जो कोई हमेँ रूठ ना जाये कहीँ।

ज़ज्बातोँ की ही रौ मेँ बहता है हर कोई,
रोके भी किसी के ये ज़ज्बात रूकते नहीँ।

बहते झरनोँ मेँ हाथ धोता है हर कोई ,
स्वच्छता झरनोँ की फिर भी मिटती नहीँ।

'अंजान' खुदा से भी पहले हमेँ याद आयेगा कोई ,
तुम्हेँ तो देखा है खुदा को तो देखा ही नहीँ।

38 टिप्पणियाँ:

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

प्रेम की गहन अभिव्यक्ति।

वन्दना ने कहा…

बेहद खूबसूरत्।
आपको और आपके परिवार को नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाये ......

sada ने कहा…

वाह ...बहुत ही खूबसूरत शब्‍द हैं इस रचना में बधाई इस अभिव्‍यक्ति के लिये ..नववर्ष की शुभकामनाओं के साथ ...।

nivedita ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति .
नया वर्ष मंगलमय हो ...

: केवल राम : ने कहा…

दीदार किया जब से तेरा भाया ना कोई ,
पाने की आरजू मेँ कोई मिट ना जाये कहीँ
बहुत प्रभावी पंक्तियाँ प्रेम के एहसासों से भरपूर हर एक पंक्ति बहुत सुंदर गजल ..शुक्रिया

: केवल राम : ने कहा…

आदरणीय डॉ. अशोक कुमार जी
आपको नव वर्ष 2010 की हार्दिक शुभकामनायें ...कबूल करें
और हार्दिक प्रसन्नता के साथ आपको जन्मदिन* की अग्रिम हार्दिक शुभकामनायें ..स्वीकार करें

Kunwar Kusumesh ने कहा…

दीदार किया जब से तेरा भाया ना कोई ,
पाने की आरजू मेँ कोई मिट ना जाये कहीँ

उफ़, दीदारे यार भी बड़ा जान लेवा होता है भाई

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

खूबसूरती से लिखे जज़्बात ...

नव वर्ष की शुभकामनाएँ

निर्मला कपिला ने कहा…

खूबसूरत अभिओव्यक्ति। अपको भी सपरिवार नये साल की हार्दिक शुभकामनायें।

Asha ने कहा…

happy new year to you
Asha

संजय भास्कर ने कहा…

अशोक कुमार जी
खुशियों भरा हो साल नया आपके लिए

संजय भास्कर ने कहा…

आपने ब्लॉग पर आकार जो प्रोत्साहन दिया है उसके लिए आभारी हूं

शाहिद मिर्ज़ा ''शाहिद'' ने कहा…

बहुत सुन्दर लिखा है
नए साल की हार्दिक शुभकामनाएं.

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

>>> प्रवीण पाण्डेय जी गजल के लिए प्रोत्साहन के लिए शुक्रियाँ।

>>> वन्दना जी हौसला अफजाई के लिए आभार !

>>> सदा जी उत्साहबर्धन के लिए शुक्रियाँ ।

>>> निवेदिता जी आप पहली बार ब्लोग पर आई आप का स्वागत है ।

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

>>> केवल राम जी
>>> कुवँर कुशमेश जी
>>> संगीता स्वरूप जी
>>> निर्मला कपिला जी

आप सभी का ब्लोग पर आने और आपके प्रोत्साहन के लिए तहेदिल से शुक्रियाँ ।

बेनामी ने कहा…

Il semble que vous soyez un expert dans ce domaine, vos remarques sont tres interessantes, merci.

- Daniel

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बहते झरनोँ मेँ हाथ धोता है हर कोई ,
स्वच्छता झरनोँ की फिर भी मिटती नहीँ।

वाह एक दम नयी सोच...इस रचना के लिए बधाई स्वीकार करें.


नीरज

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

>>> आशा जी
>>> संजय भास्कर जी
>>> शाहिद मिर्जा "शाहिद" जी
>>> नीरज जी

आप सभी का ब्लोग पर आने तथा गजल को सराहने और उत्साह बढ़ाने के लिए आपके स्नैह का शुक्रियाँ ।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

'अंजान' खुदा से भी पहले हमेँ याद आयेगा कोई ,
तुम्हेँ तो देखा है खुदा को तो देखा ही नहीँ...
bahut hi badhiyaa

अनुपमा पाठक ने कहा…

भावमयी अभिव्यक्ति!
सुन्दर!

Anjana (Gudia) ने कहा…

सुन्दर!
नव वर्ष की शुभकामनाएँ

Navin C. Chaturvedi ने कहा…

खूबसूरत नगमा

Akhtar Khan Akela ने कहा…

bhaayi ashok ji is snsar ko aese hi khushnumaa ngmon or gzlon se sjaaye rkhna bhut khub likh rhe ho thodi si jln bhi hoti he lekin kya kren bhayi hmare bhayi likh rhe hen isliyen gr se sina bhi ful jata he isliyen mubarkbaad svikar kro bhayi . akhtar khan akela kota rajsthan

Minakshi Pant ने कहा…

बहुत खूबसूरत लिखा है !
नववर्ष की बहुत बहुत शुभकामनाएं

Bhushan ने कहा…

अच्छी भावाभिव्यक्ति. नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं.

ZEAL ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति

URDU SHAAYRI ने कहा…

Nice post.

ग़ज़ल

दिल लुटने का सबब

हम को किसके ग़म ने मारा ये कहानी फिर सही
किसने तोड़ा दिल हमारा ये कहानी फिर सही

दिल के लुटने का सबब पूछो न सबके सामने
नाम आएगा तुम्हारा ये कहानी फिर सही

नफ़रतों के तीर खाकर दोस्तों के शहर में
हमने किस किस को पुकारा ये कहानी फिर सही

क्या बनाएं प्यार की बाज़ी वफ़ा की राह में
कौन जीता कौन हारा ये कहानी फिर सही

-Masroor Anwar
'हिंदुस्तान , पृष्ठ 9 , 7-1-2011'

कुमार पलाश ने कहा…

प्रेम की गहन अभिव्यक्ति।

Mukesh Kumar Sinha ने कहा…

बहते झरनोँ मेँ हाथ धोता है हर कोई ,
स्वच्छता झरनोँ की फिर भी मिटती नहीँ।

bahut gahri baat, kabhi koi pavitrata gandagi se khatm nahi hoti..:)

bahut bahut badhai...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

दीदार किया जब से तेरा भाया ना कोई ,
पाने की आरजू मेँ कोई मिट ना जाये कही ...

Khud ko mita kar hi use paaya ja sakta hai ... yahi to jeeevan hai .. lajawab sher hai ...

वीना ने कहा…

दीदार किया जब से तेरा भाया ना कोई ,
पाने की आरजू मेँ कोई मिट ना जाये कही

बेहद सुंदर रचना...मतला भी बहुत खूबसूरत है...

रजनी मल्होत्रा नैय्यर ने कहा…

दीदार किया जब से तेरा भाया ना कोई ,
पाने की आरजू मेँ कोई मिट ना जाये कहीँ


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बहुत sundar prastuti ...........

ख़ुद को मिटा कर आबाद किया गुलशन को बहारों ne,
जब खिलने का वक़्त आया तो दे गए खिज़ा नजारों को.

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

>>>रश्मि प्रभा जी
>>>अनुपमा पाठक जी
>>>अंजना गुड़िया जी
>>>नवीन जी

आप सभी का ब्लोग पर आने के लिए एवं आपके स्नैह तथा प्रोत्साहन के लिए दिल से शुक्रिया ।

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

>>>अख्तर खान अकेला जी
>>>मीनांक्षी पंत जी
>>>भूषण जी
>>>जील जी

आप सभी का ब्लोग पर आने तथा उत्साह बर्धन के लिए तहे दिल से शुक्रिया ।

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

बेहद खूबसूरत् अभिव्यक्ति.....

Dr. Ashok palmist blog ने कहा…

>>>मसरूर अनवर जी
>>>कुमार पलाश जी
>>>मुकेश कुमार सिन्हा जी
>>>दिगम्बर नासवा जी

आप सभी का ब्लोग पर आने एवं उत्साह बढ़ाने तथा आपके स्नैह के लिए आभारी हूँ ।

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत खूबसूरत अभिव्यक्ति.

रोली पाठक ने कहा…

'अंजान' खुदा से भी पहले हमेँ याद आयेगा कोई ,
तुम्हेँ तो देखा है खुदा को तो देखा ही नहीँ।
बहुत खूब......
खूबसूरत ग़ज़ल है.....