रविवार, जनवरी 23, 2011

जब लफ्ज मैँ बन जाता हूँ


जब लफ़्ज मैँ बन जाता हूँ ,
महफिल मेँ गुनगुनाया जाता हूँ ।

जब तीर मैँ बन जाता हूँ ,
नजरोँ से चलाया जाता हूँ ।

गुलशन से लाया जाता हूँ ,
हार गले का बनाया जाता हूँ ।

जब ताज मैँ बन जाता हूँ ,
सहरा मेँ लगाया जाता हूँ ।

हस्ती है मेरी उस फूल सी ,
जिसका इत्र बनाया जाता हूँ ।

31 टिप्पणियाँ:

vandan gupta ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (24/1/2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।
http://charchamanch.uchcharan.com

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

कितने काम आती है ज़िन्दगी।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

जब लफ़्ज मैँ बन जाता हूँ ,
महफिल मेँ गुनगुनाया जाता हूँ ।
bahut badhiyaa , mahfil ki shaan

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

महफ़िल की रौनक बने रहें ..खूबसूरत रचना ...

हँस्ती -- को हस्ती कर लीजिए ..

डॉ. मोनिका शर्मा ने कहा…

बहुत सुंदर रचना ....

वाणी गीत ने कहा…

गीत , गुल, खुशबू और तीरंदाजी भी ...
सुन्दर रचना !

दिगम्बर नासवा ने कहा…

जब तीर मैँ बन जाता हूँ ,
नजरोँ से चलाया जाता हूँ ...

बहुत खूब ... तीर बनने हुनर भी सब को कहाँ अत है ... बेहतरीन ग़ज़ल है ....

सदा ने कहा…

बहुत खूब कहा है ...।

Parul kanani ने कहा…

pahli do panktiyon mein hi 'waah' nikal gayi..puri rachna ki to kya hi baat hai...beautiful :)

Kailash Sharma ने कहा…

बहुत ख़ूबसूरत...

Minakshi Pant ने कहा…

एक ही इन्सान के इतने सारे किरदार पेश किया अपने और हर किरदार का एक खुबसूरत अंदाज मै परिचय !

बहुत खुबसूरत अंदाज़ बधाई !

डॉ. जेन्नी शबनम ने कहा…

bahut khoob, badhai.

Kunwar Kusumesh ने कहा…

हस्ती है मेरी उस फूल सी ,
जिसका इत्र बनाया जाता हूँ .

सुन्दर शेर ,बधाई.

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> वन्दना जी
>>> प्रवीण पाण्डेय जी
>>> रश्मि प्रभा जी
>>> संगीता स्वरूप जी

आप सभी का ब्लोग पर आने और प्रोत्साहन तथा सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> डाँ. मोनिका शर्मा जी
>>> वाणी गीत जी
>>> दिगम्बर नासवा जी
>>> सदा जी

आप सभी का ब्लोग पर आने और हौसला अफजाई के लिय दिल से शुक्रिया ।

Anjana Dayal de Prewitt (Gudia) ने कहा…

bahut sunder!

निर्मला कपिला ने कहा…

हस्ती है मेरी उस फूल सी ,
जिसका इत्र बनाया जाता हूँ ।
बहुत सुन्दर रचना है इत्र बन कर सब मे खुशी की खुश्बू फैलाओ। शुभकामनायें\

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> पारूल जी
>>> कैलाश सी शर्मा जी
>>> मिनाँक्षी पंत जी
>>> जेन्नी शबनम जी

आप सभी का ब्लोग पर आने तथा सहयोग और प्रोत्साहन के लिए आपका आभारी हूँ ।

Unknown ने कहा…

जब लफ़्ज मैँ बन जाता हूँ ,
महफिल मेँ गुनगुनाया जाता हूँ ।

क्या बात है
बहुत खूब...

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत ही भावपूर्ण रचना। मन खुश हो गया पढकर।

www.navincchaturvedi.blogspot.com ने कहा…

जब तीर मैँ बन जाता हूँ ,
नजरोँ से चलाया जाता हूँ ।
सुंदर ख़याल अशोक भाई, बधाई|

Shah Nawaz ने कहा…

बेहद खूबसूरत रचना है अशोक भाई.. बेहतरीन... अर्थपूर्ण!!!

मुकेश कुमार सिन्हा ने कहा…

bahut pyari rachna...:)

mera blog khul nahi raha, agar koi suggestion ho to please den!!:(

Dr. Zakir Ali Rajnish ने कहा…

छोटे शेरों में बडी बात कह गये आप। बधाई।

---------
जीवन के लिए युद्ध जरूरी?
आखिर क्‍यों बंद हुईं तस्‍लीम पर चित्र पहेलियाँ ?

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> कुवँर कुशमेश जी
>>> अंजना (गुड़िया) जी
>>> निर्मला कपिला जी
>>> वीना जी

आप सभी का ब्लोग पर आने तथा प्रोत्साहन के लिए तहेदिल से शुक्रिया ।

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> मनोज कुमार जी
>>> नवीन सी चर्तुवेदी जी
>>> शाहनवाज जी
>>> मनोज कुमार सिँहा जी

आप सभी का ब्लोग पर आने तथा सहयोग के लिए हार्दिक धन्यवाद ।

केवल राम ने कहा…

जीवन के हर रंग को समेटे यह रचना बहुत भावपूर्ण है ....आपका आभार डॉ . अशोक जी

रेखा श्रीवास्तव ने कहा…

बहुत कीमत है इस इंसान की, वह बात और है की किस रूप में हम उसको सार्थक बना सकते हैं. बहुत सुंदर शब्दों में भावों को पिरोया है.

संजय भास्‍कर ने कहा…

आदरणीय डॉ अशोक जी
नमस्कार !
बहुत खुबसूरत अंदाज़
..........दिल को छू लेने वाली प्रस्तुती

DR.ASHOK KUMAR ने कहा…

>>> जाकिर अली "रजनीश" जी
>>> केवल राम जी
>>> संजय भास्कर जी
>>> रेखा श्रीवास्तव जी

आप सभी का ब्लोग पर आने तथा उत्सासबर्धन और स्नैह के लिए बहुत बहुत शुक्रियाँ ।

Sadhana Vaid ने कहा…

बहुत सुन्दर रचना है अशोक जी ! इससे बेहतर और क्या सार्थकता दी जा सकती है जीवन को ! आपका हर ख्याल अनोखा है और अंदाज़े बयां बहुत ही शानदार ! बहुत-बहुत बधाई !